दोस्तों... मेरी अगली कविता एक प्रेम कविता है... ये कविता मेरी इस महीने में पांचवी प्रेम कविता है... आप बस दुआ करें की... अब मैं बार बार क्या बोलूं की क्यों दुआ करें... खैर... इसका शीर्षक है - तुम्हारी यादों में (परिदर्शन) . इसे मैंने लिखा है १५ मार्च २०११ को :
तुम्हारी यादों में (परिदर्शन*)...
आज
ज़िन्दगी
फिर उसी मोड़ पर
ले आयी है
जहाँ
तुमने
बड़े प्यार से
अपनी नज़रों के
शोख इशारे से
मुझे अपने
करीब
था बुलाया
किया था
बैठ जाने का
इशारा
हाँ... वहीँ, जहाँ
कभी मैं तुम्हारे साथ
बैठा था
पहली बार
डाले
हाथों में हाथ
जब
तुम
मेरे पास
नाराज़गी से उबार
जाने के बाद आये
अब
जबकि
मैं
वहां
गया तो
वहां की हवा
मानो
चुपके से
कानो मैं
सरगोशी कर
पूछ रही हो
तुम अकेले क्यूँ आये
जाओ
वापस जाओ
और लेकर आओ
अपने निज आत्मस्वरूप
अपने प्यार को
अपनी ज़िन्दगी के साथ
आओ
ये जगह
ये हवा
ये फिजा
तुम दोनों की है
केवल
तुम्हारे अकेले की नहीं
ये मत समझना
की
तुम यहाँ
अकेले आ सकते हो
इसका
कोई जवाब
मेरे पास न था
क्या जवाब देता मैं
फिर खो गया
तुम्हारी यादों मैं...
ll विकी तिवारी ll
*परिदर्शन - Flashback
तुम्हारा, तुम्हारा ही तो
विकी तिवारी
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