24 October 2010

Day 14, Office, Jabalpur (M.P.)

NASHA - 2

रिन्दों से सुना है कि
जीवन में एक न एक
नशा ज़रूरी होता है
मैंने सोचा -
" क्या इसलिए इंसान का जन्म होता है "
खेर...
मुश्किलों से
हार कर
थक कर
टूट कर
जब
नशे का आदि हुआ
तो काफी अंतराल बाद
बन्दों ने मुझसे कहा -
" क्यों नशा करते हो,
क्या तुम अपने आप को
निराश हताश पाते हो "
तब उन्होंने परिभाषित किया
शराब बनाम नशे को
कि
अगर शराब पीने से
इंसान  को सहारा मिलता
उस क्षण
इसे पीने के बाद
इंसान लडखडाता नहीं... SAMAAPT


आपका... आपका ही तो...

विक्की तिवारी...

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