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24 October 2010

Day 13, Office, Jabalpur (M.P.)

NASHA - 1

शायद ही कभी किसी का
इस बाt पर ध्यान गया हो
कि नशा और निशा में
कितनी ही रही समानता हो
देखा जाए तो ये दोनों
भाई behan हैं
भाई behan हैं ?
हाँ...
नशा करके जीवन में अँधेरा होता hai
और
निशा तो है रात,
काली घनेरी रात
हम सबने देखा, सुना, महसूस किया होगा कि
सिगरेट जिसके एक सिरे पर धुआं तो
दुसरे पर बेवक़ूफ़ होता है
आज के ज़माने में कोई सिगरेट न पीये
तो हमे अचरज होता है
अब इसकी behan कि सुध लें
शराब अगर इसे तोडा जाए तो मिलता है
shar और आब
मतलब
तीरों कि नदी
ये शरीर को बींध डालती है
शरों कि भांति
पान करता है हमारे ही शरीर का पान
अन्दर ही अन्दर ख़त्म कर देता है हमारे शरीर कि आन
इसका ही बही है गुटखा भी
जो हमारे शरीर कि प्रतिरोधक क्षमता को खा जाता है
इन सबसे से ये समझ आता है
कि नशा
समूचे जीवन को सुचारू रूप से खा जाता है... SAMAAPT

Vicky Tiwari