04 December 2010

Day 17, Home, Jabalpur (M.P.)

Aaj Dil Ne Socha Yun...

आज दिल ने सोचा यूँ
कि
किसी अपने को क्या दूँ
उसे में
कैडबरी देरी मिल्क दूँ
'रिश्तों की मिठास वाली'
या फिर
पेप्सी दूँ
क्योंकि
'ये दिल मांगे मोरे'
फिर सोचा
एयरटेल की सिम दूँ
जिससे
'एक्सप्रेस यौर्सेल्फ़' किया जा सके
क्यों न
विल्स दूँ
अरे वी आर 'मेड फॉर याच अदर' यार
कुछ समझ नहीं आ रहा था
मन नहीं मन तो सोचा की
कोलगेट दूंगा
'ये है हमारा सुरक्षा चक्र'
अंत में तय हुआ की उसे
एल आई सी की पालिसी दूंगा
'ज़िन्दगी के साथ भी,
ज़िन्दगी के बाद भी...'

Vicky Tiwari
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28 November 2010

Day 16, Home, Jabalpur (M.P.)

Badle Main...

हमने हमेशा से यही
सुना है
जो हम दुनिया को
देते हैं
वो हमे दुगना चौगुना होकर हमे
मिलता है
चाहे वो पैसा हो या इज्ज़त
हमे सब कुछ बढ़ चढ़ कर
वापस मिलता है
पर
ऐसा क्यूँ होता है
कि
जब हम
किसी को 
प्यार करते हैं
तो वो
बहुत होकर नहीं मिलता
आखिर क्यूँ...
है कोई जवाब ?

प्यार पे में मरूं
प्यार पे तुम भी मरो
फूल सा में झरूँ
फूल सी तुम भी झरो
एक वसीहत नस्ल - ए - कल के नाम लिख एहसास कि
दस्तखत एक तुम भी करो
दस्तखत एक में भी करूँ...

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Vicky Tiwari