15 February 2011

Day 30, Office, Jabalpur (M.P.)



कोई दीवाना कहता है कोई पागल समझता है
मगर धरती की बैचैनी को बस बादल समझता है
मैं तुझसे दूर कैसा हूँ तू मुझसे दूर कैसी है
ये तेरा दिल समझता है या मेरा दिल समझता है
मोहब्बत एक ऐसा सौ की पवन सी कहानी है
कभी कबीर दीवाना था कभी मीरा दीवानी है
यहाँ सब लोग कहते हैं मेरी आँखों में आंसू हैं
जो तू समझे तो मोती है जो ना समझे तो पानी है
समंदर पीर का अन्दर है लेकिन रो नहीं सकता
ये आंसू प्यार का मोती है इसको खो नहीं सकता
मेरी चाहत को अपना तू बना लेना मगर सुन ले
जो मेरा हो नहीं पाया वो तेरा हो नहीं सकता
भ्रमर कोई कुमुदनी पे मचल बैठा तो हंगामा
हमारे दिल में कोई ख्वाब पल बैठा तो हंगामा
अभी तक डूब कर सुनते थे सब किस्सा मोहब्बत का
मैं किस्से को हकीकत मैं बदल बैठा तो हंगामा...

ll अज्ञात ll

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