28 November 2010

Day 16, Home, Jabalpur (M.P.)

Badle Main...

हमने हमेशा से यही
सुना है
जो हम दुनिया को
देते हैं
वो हमे दुगना चौगुना होकर हमे
मिलता है
चाहे वो पैसा हो या इज्ज़त
हमे सब कुछ बढ़ चढ़ कर
वापस मिलता है
पर
ऐसा क्यूँ होता है
कि
जब हम
किसी को 
प्यार करते हैं
तो वो
बहुत होकर नहीं मिलता
आखिर क्यूँ...
है कोई जवाब ?

प्यार पे में मरूं
प्यार पे तुम भी मरो
फूल सा में झरूँ
फूल सी तुम भी झरो
एक वसीहत नस्ल - ए - कल के नाम लिख एहसास कि
दस्तखत एक तुम भी करो
दस्तखत एक में भी करूँ...

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Vicky Tiwari

26 October 2010

Day 15, Office, Jabalpur (M.P.)

VRIDDH

वृद्ध
इस शब्द से
हम
जाने क्या समझ बैठते हैं
समझते हैं
कि ये एक
बूढी,
कमज़ोर,
लाचार सी
दिखने वाली एक काया है
लेकिन नहीं
सिर्फ उम्र कि वृद्धि को
वृद्ध करक देना उचित नहीं
ये वृद्धि है उसके अनुभवों कि
वृद्धि है उसकी जिम्मेदारियों कि
वृद्धि है उसके माथे कि शिकन कि
इस वृद्ध कि आज्ञा कि
avagya कर हम भूल जाते हैं
कि
एक दिन
हम bhi
होंगे
वृद्ध...

 SAMAAPT

aapka...
aapka hi to...

विक्की तिवारी