19 February 2011

Day 31, Home, Jabalpur (M.P.)

यह कविता हमने 29 / 09 / 2007 को लिखी थी :


ज़िन्दगी क्या है
ये आज तक किसने जाना है
कोई बताये मुझे
की ये ज़िन्दगी
है क्या बाला
सही गलत होता क्या है
कोई बताये
क्या ये 'सही' महज़
किसी की आज्ञा की प्रतिपूर्ति
करना है
या फिर
'गलत' है
अपनी इच्छाओं
अपनी रुचियों को
पूरा करना
बता सकते हैं आप
की
अपने निर्णय लेना
कितना सही है
कितना गलत
और 
लोगों को 
वो कितना सही
कितना गलत लगता है
इस सवाल का जवाब
शायद
दुनिया के
किसी मनुष्य
किसी इंसान
के पास नहीं है
सबका एक ही जवाब रहता है
एक सा ही
"ये तुम्हारा decision है,
अपने फैसले खुद किया करो"
और अगर कुछ गलत हो जाये
तो
यह सुनने मिलता है
"ये तुम्हारा decision था,
अब तुम्ही निपटो इससे"
ऐसे में
कोई साथ खड़े होना भी
पसंद नहीं करेगा आपके साथ...


आपका, आपका ही तो

Vicky Tiwari

15 February 2011

Day 30, Office, Jabalpur (M.P.)



कोई दीवाना कहता है कोई पागल समझता है
मगर धरती की बैचैनी को बस बादल समझता है
मैं तुझसे दूर कैसा हूँ तू मुझसे दूर कैसी है
ये तेरा दिल समझता है या मेरा दिल समझता है
मोहब्बत एक ऐसा सौ की पवन सी कहानी है
कभी कबीर दीवाना था कभी मीरा दीवानी है
यहाँ सब लोग कहते हैं मेरी आँखों में आंसू हैं
जो तू समझे तो मोती है जो ना समझे तो पानी है
समंदर पीर का अन्दर है लेकिन रो नहीं सकता
ये आंसू प्यार का मोती है इसको खो नहीं सकता
मेरी चाहत को अपना तू बना लेना मगर सुन ले
जो मेरा हो नहीं पाया वो तेरा हो नहीं सकता
भ्रमर कोई कुमुदनी पे मचल बैठा तो हंगामा
हमारे दिल में कोई ख्वाब पल बैठा तो हंगामा
अभी तक डूब कर सुनते थे सब किस्सा मोहब्बत का
मैं किस्से को हकीकत मैं बदल बैठा तो हंगामा...

ll अज्ञात ll