~ Happy Rose Day Doston ~
दोस्तों, कल मैं अपने भैया से बात कर रहा था... उन्होंने मुझसे एक बहुत अच्छी बात कही, वो ये की तुम दूसरों के लेख की जगह अपने लेख लिखो, ज्यादा अच्छा रहेगा क्योंकि वो बात तुम्हारे दिल की होगी. मुझे उनकी ये बात बहुत अच्छी लगी और हम उसे मानेगे भी 14 onwards... तब तक यानी आज 7 से लेकर 13 तक आप दूसरों के लेख पढ़िए ताकि आप उनमें और मेरे लेखों में अपने सुझाव दे पायें कि हम कहाँ तक प्यार को समझ पाए हैं क्योंकि व्यक्ति जो भी लिखता है उसे अपनी लेखनी को और परिष्कृत करने के लिए आपने पाठकों की राय की बहुत ज़रुरत होती है -
मैं प्यार की वेदी पर चढ़ा दूंगी ये दुनिया
'सखी चिंता कहते हैं किसे, सखी यातना कहते हैं किसे, तुम जो रटते रहते हो दिन-रात, प्यार-प्यार, सखी प्यार की परिभाषा क्या' रविंद्रनाथ टगोर के इस गाने में एक सहेली दूसरी सहेली से यही पूछती है की प्रेम की परिभाषा क्या है ? अब प्रेम की कोई एक परिभाषा हो तो बताएं. एक मायना हो तो समझ आये. जितना सरल शब्द है प्रेम, उतना ही मुश्किल है इसे समझना.
प्रेम सरेंडर है. अगर निजी बात करूँ तो प्रेम समर्पण है. अगर आप किसी से प्रेम करते हैं तो समर्पण का भाव खुद-ब-खुद आ जाता है. आप 'मैं' और 'अहम्' से ऊपर उठते हैं. त्याग स्थाई भाव बन जाता है. सब कुछ न्योछावर कर देना चाहते हैं उस शख्स पर, जो आपको निहायत अज़ीज़ है. जिसकी एक मुस्कराहट पर आप सारे गम भूल उसके साथ मुस्कुराने लगते हैं. जिसकी खनखनाती हंसी से आपका दिन खुशगवार हो जाता है. वो उदास हो तो आपका चेहरा भी स्याह पड़ जाता है. साथी की जो कमियां कभी आपको खलती थी, धीरे-धीरे वही उसका स्टाइल लगने लगती हैं.
प्रेम संघर्ष है. अनवरत. कभी ख़त्म न होने वाला संघर्ष, दो प्रेमी सात फेरे ले लें तो प्यार सफल मान लिया जाता है. कम-से-कम हिंदुस्तान में तो प्रेम की परिणिति शादी ही है. सोहनी-महिवाल, हीर-रांझा और लैला मजनू ने प्रेम किया, लेकिन वो इसे शादी के अंजाम तक न ला पाए. टीस रह गयी. इसलिए ये दुखांत है.
लिओ तोल्स्तोय मानते हैं की 'प्रेम ही जीवन है, मैं जो कुछ भी समझ पाता हूँ, उसकी वजह सिर्फ प्रेम ही है.'
अमेरिकी कवियत्री निकी जीओवानी अपनी एक कविता मैं कहती हैं -
खूबसूरत आमलेट लिखा मैंने
खाई एक गरम कविता
तुमसे प्रेम करने के बाद
गाडी के बटन लगाये
कोट चलाकर मैं
घर पहुंची बारिश मैं
तुमसे प्रेम करने के बाद
लाल बत्ती पर चलती रही
रुक गयी हरी होती ही
झूलती रही बीच मैं कहीं
यहाँ भी
वहां भी
तुमसे प्रेम करने के बाद
समेत लिया बिस्तर मैंने
बिछा लिए अपने बाल
कुछ तो गड़बड़ है
लेकिन मुझे नहीं परवाह
उतार कर रख दिए दांत
गाउन से किये गरारे
फिर खड़ी हुई मैं
और लिटा लिया खुद को
सोने के लिए
तुमसे प्रेम करने के बाद
पाब्लो नेरुदा के लिए प्रेम कभी न ख़त्म होने वाला भाव है, वो कहते हैं -
अब मैं उसे प्यार नहीं करता हूँ
उसमें कोई शक नहीं
लेकिन शायद उसे प्यार करता हूँ
जर्मन कवि बर्तोल्त ब्रेकथ प्रेम को कमजोरी से आंकते हैं. ये बानगी देखिये -
कमजोरियां तुम्हारी कोई नहीं थी
मेरी एक थी, मैं करता था प्यार
भारत की एनी जैदी कहती हैं की -
प्रेमी करीब आना चाहे
बिलकुल करीब
तो गहरी साँस बनाकर थाम लो उसे
तब तक, जब तक टूट न जाओ
सभी रचनाओं में एक ही भाव है - प्रेम का भाव लेकिन फील सबका अलग अलग है. कहीं कहीं प्रेम सुरक्षा भी है. प्रेम देता है होंसला, प्रेम जनता है आपकी हिम्मत.
प्रेम स्वार्थ है. कहता है की जो हमारा है, वो हमारा होकर ही रहे जीवन भर. प्रेम सिखलाता है किसी पर अपना हक़ समझना. और कई दफा मजबूर कर देता है हर बात मानने के लिए. फूल की फरमाइश करें तो आपका साथी पूरा बगीचा उठा लाये, मन की किताब पढ़ ले. आँखों में झांकते ही दिल की बात समझ जाए. अपेक्षाएं बढ़ता है प्रेम. डिमांड पूरी होती रहे तो सब अच्छा. कमी आयी नहीं की प्रेम का परा नीचे उतरना शुरू. लेकिन स्वार्थ है भी तो क्या हुआ ? प्रेम तो है. मोहब्बत की बयार बहती रहे तो खुदगर्जी की धूल धीरे-धीरे उड़ जाएगी. स्वार्थ इतना हावी न हो जाए की प्रेम बंधन लगने लगे.
प्रेम वासना है. प्रेम शरीरी है. कहते हैं प्रेम की गहराई मैं कहीं-न-कहीं शारीरिक घनिष्टता छिपी है. कहते हैं दो शरीरों का मिलन आत्माओं का मिलन होता है. कहते हैं अन्तरंग होकर एक-दूसरे से कंनेक्ट हुआ जा सकता है. एक-दूसरे के प्रति गूढ़ प्रेम को महसूस किया जा सकता है. प्रेम के पलों में नीरस से नीरस व्यक्ति भावुक हो उठता है. शायद इसीलिए सम्भोग को प्रेम की पराकाष्ठा मानते हैं. वहीँ एक प्लेटोनिक प्रेम भी है. आउट ऑफ़ द वर्ल्ड. कोई चाह नहीं. कोई कंडीशन नहीं. मन से मन का रिश्ता. दिल से दिल को राह. बिना तार का कर्रेंट है प्लेटोनिक प्रेम.
प्रेम को लेकर भ्रान्ति है. कहते हैं की एक बार प्यार हो जाए तो ता उम्र रहता है. मेरा मानना है की प्यार जन्म लेता है, प्यार जवान होता है, प्यार भूढ़ा होता है और फिर प्यार मरता भी है, लेकिन हाँ, प्यार में मर-मर कर जिंदा होने की ताक़त है. प्यार जो खुद को मुक्त करता है फिर प्यार करने के लिए. प्यार के भी अपने मौसम हैं.
लब्बोलुआब ये की प्यार को किसी परिभाषा में बंधना मुशकिल है, बेमानी भी. प्यार तो सिर्फ प्यार है. एक दरिया है बहता हुआ, निरंतर. इसके बहने में ही इसकी सुन्दरता है. इसके बहने में ही प्राण हैं. इसके बहने में ही जीवन है. हमारा होना ही इस बात का सबूत है की प्यार है. हमारा साँस लेना ही प्यार है. बस... यही तो है प्यार.
- माधवी शर्मा गुलेरी
आपका, आपका ही तो
Vicky Tiwari

Nice posting dear...
ReplyDelete"RAM"