24 April 2010

Day 6, Home, Jabalpur (M.P.)

अरे दोस्तों, आज में बहुत लेट हो गया ब्लॉग लिखने में। वो क्या हुआ की अभी करीब एक घंटा लाइट गोल रही इस लिए हम लेट हो गए... खेर, अब लाइट आ गयी है तो में लिखने बैठा हूँ। सुबह की शुरुआत ठीक ठाक हुई। आज में लेट उठा तो running के लिए नहीं जा पाया। आज एक बहुत बड़ा और अच्छे काम का आगाज़ हुआ। स्कूल का renovation एक दो हफ़्तों में स्टार्ट हो जायेगा। मैं अपने स्कूल, अपने रंगमंच और अपने पत्रकारिता शोध संस्थान (जो खुल नहीं सका) का नाम आसमान पे लिखे देखना चाहता हूँ।
एक-दो दिन पहले मैंने सबको एक मेसेज भेजा की यदि में एक किताब हूँ तो तुम्हारे हिसाब से मेरा नाम क्या होना चाहिए। जो reply आये वो इस प्रकार थे : चंदू , पेनफुल smile , fire ऑन mountain , एक्टिंग सीखने के १०१ फंडे , all rounder man , मेरी जंग , प्रेम पिपासा , चम्पक लाल की रोमांचक कथाएं , वीर - स्टिल इन सर्च ऑफ़ ज़ारा... लेकिन सबसे अच्छा था जो दीदी ने भेजा था : The Phoenix - one who becomes alive from his own ashes means a true survivor
आज में अपने लिए ३ किताबें लाया : (१) भारतीय संस्कृति के चार अध्याय (२) भारत इतिहास और संस्कृति (३) जो घर फूंके। इनमें से शुरू की दो भारत के इतिहास के बारे में है तीसरी व्यंग्य है। शुरू की दो तो गज़ब की किताबें हैं। उन दो किताबों में वो सब लिखा है जो आम इंसान नहीं जानता, अनभिग्य है इन सबसे.
आज मैं संदीप भाई को ठांस दिया। उन्होंने मुझे कुछ काम करने को कहा था। हमने कहा की भाई मैं अकेला हूँ, नहीं कर पाउँगा... फिर इसी विषय पर १६-१७ मिनट बात होती रही... उनको चिल्लाना बुरा लगता है, ये वोई आदमी है जिसने मुझे उस समय काम दिया जब मैं नाटक करना बंद कर दिया था या यूँ कहूँ की मैं नाटक नहीं कर पा रहा था... एक जिंदा लाश की तरह हो गया था मैं, इसने मुझसे मिलकर मुझमें प्राण फूंके थे अपने नाटक - 'कॉल' में काम देकर। इनकी बस कुछ बातें गलत हैं - टाइम के पाबंद नहीं हैं, लापरवाह हैं चीज़ों के प्रति खासकर नाटक की स्क्रिप्ट, लोगों पर जल्दी भरोसा कर लेते हैं... लेकिन आज उन्होंने कहा की मैं जल्दी लौट कर आके 'कॉल' इंग्लिश मैं करेंगे... मज़ा आएगा... पूरे जबलपुर में हम पहले ऐसे होंगे जो इंग्लिश नाटक कर रहे हैं। ये एक दुस्साहस भी होगा और एक प्रयोग भी जबलपुर के दर्शकों के साथ...
rehearsal गया था वहां कुछ ख़ास नहीं हुआ। दादा दो दिनों से नहीं आ रहे हैं। पता नहीं क्या बात है। मुझे कल मतलब आज (रात के १ बज गए हैं, दूसरा दिन लग गया है) बहुत सारी जगह जाना है.
अच्छा तो भाई लोग हम सोने जा रहे है लेकिन जाने से पहले एक काम करते जाएँ :
" एक दूजे से मिलकर पूरे hoten हैं,
aadhi aadhi एक kahani हम dono..."

Good Night

Shubhratri

Shabbakher

Jai Theatre...

1 comment:

  1. hamne kal "wings of fire" ka student edition dhoondh hi liya

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